कैसे करें कम बजट में टीवी पर विज्ञापन?

आजकल जहाँ देखा जाए इंटरनेट और मोबाइल पर वीडियो देखने की बात चल रही है| यूट्यूब, अमेज़न प्राइम, हॉटस्टार और नेटफ्लिक्स के बढ़ते दर्शकों को देख कर तो यही लगता है जैसे भारत में टीवी की पकड़ ढीली पड़ती जा रही है| परन्तु ऐसा नहीं है| BARC जो भारत में टीवी दर्शकों का लेखा जोखा रखती है, हाल ही में उसने ब्रॉडकास्ट इंडिया २०१८ सर्वे के परिणाम जारी किये हैं जिससे निम्नलिखित बातें पता चलती हैं:

  • साल २०१६ से २०१८ के बीच भारत के टीवी दर्शकों में बढ़त हुयी है| यह बढ़त ग्रामीण इलाकों में १०% और शहरी इलाकों में ४% हुयी है|
  • भारत मे टीवी वाले घरों की संख्या १८३० लाख से बढ़ कर १९७० लाख हो गयी है |

एक तरफ जहाँ भारत में तेज़ी से इंटरनेट का विकास हो रहा है, दूसरी तरफ धीरे धीरे ही सही, भारत के कई इलाकों ने प्रथम बार बिजली देखी है| इसका मतलब है जहाँ एक तरफ लोग अपने टीवी के अलावा मोबाइल पर मनोरंजन करेंगे वहीँ दूसरी तरफ लोग अपना पहला टीवी खरीदेंगे| इसीलिए यह निष्कर्ष निकालना कि  टीवी विज्ञापन की चमक खो गयी है, पूरी तरह से गलत होगा|

क्यों करें टीवी विज्ञापन?

टीवी और समाचार पत्र विज्ञापन भारत में सबसे पुराने और प्रचलित विज्ञापन हैं | कई वर्षों  पहले जब केवल रेडियो और टीवी ही आम जनता के मनोरंजन के साधन थे, लोग न सिर्फ मज़बूरी में बल्कि चाव से टीवी विज्ञापन देखा करते थे| आज भी लोग इन ब्रांड्स को पुराने विज्ञापनों से याद करते हैं जैसे धारा , डेरी मिल्क, फेविकोल, कॉम्प्लान| टीवी विज्ञापनों के निम्नलिखित फायदे हैं-

  • भारत में आज भी अधिकतर खरीददारी सभी परिवार वालों के सहमति से होती है और टीवी ही एक ऐसा माध्यम है जिसके लिए हर रोज़ परिवार एक साथ आता है |
  • टीवी पर आने वाले विज्ञापन बस ब्रांड का प्रचार नहीं करते हैं अपितु एक कहानी भी कहते हैं| इसी वजह से टीवी विज्ञापनों का प्रभाव अन्य विज्ञापन माध्यमों से अधिक होता है
  • लोगों के मन में यह धारणा है की टीवी विज्ञापन बहुत महंगे होते हैं और सिर्फ बड़ी कंपनियां ही टीवी पर प्रचार कर सकती हैं| अतः लोग टीवी विज्ञापनों पर अन्य विज्ञापनों से अधिक भरोसा करते हैं |

क्या टीवी विज्ञापन महंगे होते हैं?

हाँ यह सच है कि अन्य विज्ञापन माध्यमों के तुलना में टीवी विज्ञापनों का मूल्य कहीं अधिक हो सकता है परन्तु यह घंटे, चैनल और प्रोग्राम के हिसाब से बदलता है

– विज्ञापन जगत में एक दिन को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है- प्राइम टाइम और नॉन प्राइम टाइम : सुबह ७ बजे से लेकर शाम को ६ बजे तक का समय अधिकतर नॉन प्राइम टाइम कहलाता है जब की शाम ६ बजे से लेकर रात क १२ बजे तक का वक़्त प्राइम टाइम होता है | इसके अलावा होता है मिक्स्ड टाइम बंद जिसमें विज्ञापनों को दोनों टाइम बैंड में बराबर बांटा जाता है| प्राइम टाइम में विज्ञापन दर बहुत ज़्यादा होता है क्यूंकि इस वक़्त लोग अपने घरों में होते हैं और अधिक से अधिक लोग टीवी देखते हैं |

– कुछ चैनल अन्य चैनलों से अधिक प्रचलन में होते हैं और अधिक लोग इन्हे देखते हैं जैसे स्टार प्लस, कलर्स , सोनी और ज़ी| इनके विज्ञापन दर भी बहुत अधिक होते हैं|  इन चैनलों के लिए दर्शकों को अधिक मूल्य भी चुकाना पड़ता है अपने DTH या केबल ऑपरेटर को| इनके अलावा कुछ चैनल्स ऐसे होते हैं जिन्हे देखने के लिए दर्शकों को अलग से पैकेज नहीं लेना पड़ता| इन चैनलों को फ्री टू एयर (FTA ) चैनल कहते हैं| इनके उदाहरण हैं स्टार उत्सव, स्टार भारत, ज़ी अनमोल, कलर्स रिश्ते, आज तक|  यदि हम BARC रेटिंग देखें तो पाएंगे कि इन चैनलों के दर्शक भारत में अधिक हैं | इन फ्री टू एयर चैनलों के विज्ञापन दर अन्य पेड चैनलों से कम होते हैं |

– टीवी विज्ञापन दर कई बार टीवी प्रोग्राम पर भी निर्भर करते हैं| पॉपुलर प्रोग्राम जैसे बिग बॉस, आईपीएल के दौरान विज्ञापन दर आसमान को छू जाते हैं|

टीवी विज्ञापन कितने प्रकार के हो सकते हैं?

  • वीडियो टीवी विज्ञापन – टीवी विज्ञापन का यह सबसे आम और सबसे लोकप्रिय प्रकार है| आम तौर पर एक वीडियो टीवी विज्ञापन की लम्बाई १० सेकंड से २ मिनट तक हो सकती है | ये विज्ञापन टीवी प्रोग्राम के बीच में आये ब्रेक में चलाये जाते हैं |

  • एस्टन बैंड टीवी विज्ञापन – एस्टन बैंड टीवी स्क्रीन के नीचे वाले हिस्से में आने वाला वो विज्ञापन है जो टीवी प्रोग्राम के दौरान आता है | यह विज्ञापन स्टैटिक भी हो सकता है और एनिमेटेड भी| क्यूंकि एस्टन बैंड टीवी प्रोग्राम के बीच आते हैं और देखने में भी आकर्षक होते हैं, एस्टन बैंड का विज्ञापन दर अधिक होता है|

  • L बैंड टीवी विज्ञापन – L बैंड टीवी विज्ञापन काफी लोकप्रिय हैं, ख़ास तौर पर समाचार चैनलों पर| L बैंड के पॉपुलर होने का कारण यह है कि यह स्क्रीन को L आकार में १० सेकंड के लिए ढक लेता है इसीलिए दर्शकों का इसपर ध्यान जाना स्वाभाविक है|

  • स्क्रोलर टीवी विज्ञापन – स्क्रोलर टीवी विज्ञापन छोटे छोटे वाक्यानुमा लिखित विज्ञापन होते हैं जो स्क्रीन के निचले हिस्से में एक तरफ से दूसरे तरफ को लगातार चलते रहते हैं| एक दिन में ये विज्ञापन ५०-६० बार चल जाते हैं |

  • टेलीशॉपिंग टीवी विज्ञापन – ये २०-३० मिनट लम्बे टीवी प्रोग्राम हैं जिसमे सूत्रधार होते हैं जो किसी प्रोडक्ट के बारे में बात करते हैं या डेमो दिखाते हैं | ये आम तौर पर नॉन प्राइम टाइम बैंड में चलाये जाते हैं|

कैसे करें कम बजट में टीवी विज्ञापन?

टीवी विज्ञापन आम तौर पर महंगे हो सकते हैं लेकिन यदि हम इन निम्नलिखित चैनलों पर विज्ञापन करें जिनके विज्ञापन दर कम होते हैं तो हम कम बजट में भी अपने दर्शकों तक पहुँच सकते हैं| हमें बस इस बात का ध्यान रखना होगा की जो प्रोडक्ट हम बेचना चाहते हैं उसके ग्राहक उन चैनलों पर मिलेंगे या नहीं | निम्नलिखित हैं कुछ पॉपुलर चैनल के औसत विज्ञापन दर| ये दर वक़्त के हिसाब से बदलते रहते हैं इसीलिए सही विज्ञापन दर के लिए आप हमसे पहले संपर्क कर लें|

  • फ्री टू एयर चैनल: आम तौर पर स्टार प्लस और कलर्स जैसे जेनेरल एंटरटेनमेंट चैनल विज्ञापन के लिए महंगे होते हैं लेकिन फ्री टू एयर चैनल के तहत भी एंटरटेनमेंट, सिनेमा और समाचार चैनल आते हैं जिनके विज्ञापन दर कम होते हैं| कुछ ऐसे ही चैनल की निम्नलिखित सूची है:

  • कार्टून चैनल: आम तौर पर हम ये समझते हैं की बच्चों के प्रोग्राम बस बच्चे ही देखते हैं| यह धारणा गलत है क्यूंकि अधिकतर भारतीय घरों में एक ही टीवी सेट होता है इसीलिए अधिकतर समय बच्चे अकेले टीवी नहीं देखते बल्कि परिवार के वयस्क सदस्य भी किड्स चैनल देखते हैं| BARC की एक रिपोर्ट के अनुसार सुबह ९ से शाम ६ का वक़्त कार्टून चैनल्स का होता है

(source: A Peek into Kids Viewership by BARC India,2017)

  • म्यूजिक चैनल: म्यूजिक चैनल अधिकतर बच्चों को और नौजवानों को पसंद आते हैं|

  • धार्मिक चैनल: यदि आप वयस्कों और वृद्ध लोगों के लिए विज्ञापन देना चाहते हैं तो सुबह ६ से ९ के बीच इन चैनलों को चुन सकते हैं|

  • समाचार चैनल: जेनेरल एंटरटेनमेंट व सिनेमा के बाद समाचार चैनल सर्वाधिक लोकप्रिय हैं |

कैसे बनाएं टीवी विज्ञापन प्लान?

टीवी विज्ञापन प्लान बनाने के लिए पहले ये सुनिश्चित कर लें कि आपके भावी ग्राहक कौन हैं और किस टीवी चैनल के माध्यम से आप उनतक पहुँच सकते हैं| उसके बाद आप यह पता लगा सकते हैं कि आपका बजट क्या है और कितने दिनों का कैंपेन आप चलाना चाहेंगे|  एक बार आपने चैनल चुन लिया तो उसके बाद हम देख सकते हैं कि किस समय पर हम ये विज्ञापन चला सकते हैं ताकि हमारे सभी दर्शकों को हमारा विज्ञापन दिख जाए|

उदाहरण के लिए, हम राष्ट्रीय स्तर पर एक योग शिविर का आयोजन करने जा रहे हैं जिसके लिए हम एक महीने के लिए आस्था टीवी चैनल पर विज्ञापन देना चाहते हैं- सुबह ६ से सुबह ९ बजे के बीच कम से कम ५ बार| इसका मतलब है एक महीने में ३० दिन में हमारा विज्ञापन ३० X ५ मतलब १५० बार चलेगा| हमारा विज्ञापन वीडियो १५ सेकंड लम्बा है और आस्था चैनल का विज्ञापन दर १२० रुपये प्रति सेकंड है| मतलब एक बार विज्ञापन चलाने के लिए हमें १२० X १५ = १८०० रुपये खर्च करने होंगे| इसका मतलब है पूरे कैंपेन का व्यय लगभग १८०० X १५० = २७०००० होगा|

टीवी विज्ञापन के लिए हम किसे संपर्क कर सकते हैं?

ऊपर दिए गए विज्ञापन दरों के अलावा आप कई और चैनलों के विज्ञापन दर डी मीडिया एन्ट के वेबसाइट पर देख सकते हैं| डी मीडिया एन्ट भारत की एकमात्र ऐसी वेबसाइट है जहाँ आप २ लाख से भी अधिक विज्ञापन माध्यम ढून्ढ सकते हैं और विज्ञापन बुक भी कर सकते हैं|

इतना ही नहीं डी मिडिया एन्ट भारत की सबसे बेहतरीन टीवी विज्ञापन एजेंसी भी है| टीवी चैनलों के साथ सालों के व्यावसायिक रिश्तों के कारण डी मिडिया एन्ट आपके लिए सबसे अच्छे टीवी विज्ञापन दर सुनिश्चित कर सकता है| | यदि आपके मन में टीवी विज्ञापन को लेकर कोई सवाल है तो आप हमें संपर्क कर सकते हैं  Help@TheMediaAnt.Com ईमेल आई डी पर| अन्य टीवी चैनलों के विज्ञापन दर देखने और बुक करने के लिए इस वेबसाइट पर जाएँ:  www.TheMediaAnt.Com/Television

 

 

 

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One Reply to “कैसे करें कम बजट में टीवी पर विज्ञापन?”

  1. बहुत अच्छा. मुझे नहीं पता कि टीवी विज्ञापन वास्तव में सस्ती है

     

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